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chapter 4 Kotla house

 अश्वत, रचित, विक्रम और मेघना, वे सभी इस बात से अनजान थे कि अब वे लोग उस मनहूस घर में हमेशा के लिए कैद हो चुके थे और उन्हें बचाने आए पुलिस वाले भी, वहाँ से निकल पाने में असमर्थ थे। उस घर के रहस्यों को समझ पाना किसी के लिए भी संभव नहीं था। घर का मुख्य दरवाज़ा स्वतः बंद होने के बाद, वे सभी घबरा गए और उस दरवाज़े को खोलने के लिए रचित और विक्रम दरवाज़े पर झपट पड़े और दरवाज़े के हैंडल को पकड़ कर अपना पूरा बल लगाते हुए उसे खींचने लगे, लेकिन पूरा प्रयास करने के बाद भी वे दोनों मिलकर भी उस दरवाज़े को खोल नहीं पाए। “ माद***, खुल जा माद***, खुल जा। ” विक्रम गुस्से में अनाप-शनाप गालियाँ बक रहा था। मेघना ने आगे बढ़कर घबराते हुए, दरवाज़े को पीटना शुरू कर दिया, वह डर के मारे जोर-जोर से चीखने लगी, “ कोई है? प्लीज़ हेल्प। कोई है? कोई तो दरवाज़ा खोल दो यार! प्लीज़! ” अचानक घर के भीतर जितने भी रोशनदान थे, प्रज्वलित हो उठे और पूरा घर रोशनी से जगमगा उठा। उन लोगों ने डरकर यहाँ-वहाँ देखना शुरु कर दिया लेकिन कोई नज़र नहीं आया। यह समझना बहुत मुश्किल था कि रोशनदान किसी ज्वलनशील पदार्थ से प्रज्वलित हो रहे थे...

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 “ भागो! ” अश्वत ने नैना को वहाँ से भाग जाने का आदेश दिया, शेर ने नैना को देखा तो वह दरवाजे पर ही खड़ी थी कि उसने तुरंत बिना समय गवाएं उस पर छलांग मार दे, नैना अपनी जान बचाने के लिए तेजी से दरवाज़ा खोल कर फटाफट उस कमरे से निकल गई, लेकिन वह नैना को दबोच पाता उससे पहले ही नैना ने दरवाजा बंद कर दिया दरवाज़ा बंद करते ही वह डर कर दरवाजे से दूर हट कर खड़ी हो गई उसके माथे अगले पर पसीना ही पसीना था। द्वार बंद करते ही नैना उससे दूर हट कर खड़ी हो गई, वह अभी भी घबराहट में दरवाज़े को यह सोचकर ताक रही थी कि कहीं वह बोलता हुआ शेर कूदकर उसके सामने न प्रकट हो जाए। “ डरो मत! अब वो इस कमरे में नहीं आने वाला। ” उसे पीछे से स्वयं की आवाज़ सुनाई दी, उसने तुरंत पीछे मुड़कर देखा। उसने स्वयं को अपने सामने देखा, उसके सामने उसकी प्रतिरूपी नैना बैठी थी। उस प्रतिरूपी नैना कि उम्र नैना से अधिक थी और उसका चेहरा एवं बाल थोड़े गंदे दिख रहे थे, उसने ढीले-ढाले कपड़े पहने हुए थे, उसका आकर्षक शरीर अब अनाकर्षक हो चुका था, जिसकी उसे परवाह तक नहीं थी और उस मनहूस घर में जीवन भर के लिए कैद होने की चिंता तो उसके मुख पर दू...

Kotla house check words

 कंखियों अश्वत अश्वेत असद अशोक सिगरेट या सिग्रेट क्योंकि या क्यूंकि व क्यूँकि खंडर खंडहर पहुंचा पहुंच पहुंचकर पहुंचे हसी हंसी फंसा अमन अमल अदम अमर असद संभवतः संभवता आखरी आखिरी दर दरा डरा “मैंने ऐसा चमत्कार पहली बार देखा है कि आप किसी दरवाजे से अंदर जाते हैं और जब उसी दरवाजे से बाहर निकलते हैं तो कहीं दूसरे स्थान पर पहुँच जाते हैं। उस डायरी में भी कुछ ऐसा ही लिखा था लेकिन मैंने कभी विश्वास नहीं किया।” एक दिन, इस केस कि कार्यवाही के सिलसिले में उसे एक ऑटो वाला मिला, जिसने उसे बताया था कि आखरी बार उस ऑटो वाले ने ही उन बच्चों को कोटला हाउस छोड़ा था। लेकिन वे बच्चे कोटला हाउस क्यों जाना चाहते थे, इसका जवाब उस ऑटो वाले के पास भी नहीं था। पहली बार उसे किसी ने अंगरक्षक के स्थान पर नौकर कहा था उसे नौकर शब्द से नफरत थी अगर दुबारा नौकर बोला तो मैं तेरा मुंह तोड़ दूंगा पहले आप मेरे सवालों का जवाब दो, उसके बाद हम बताएंगे कि हम यहाँ क्यों आए। किंवदंतियों गेंडों गैंडों गेंदों व्यंग्यात्मक महंगी हांलही हूं हुँ हूँ हुं छिनूंगा ढूंढने खराटे खर्राटे  परदे पर्दे कोई ऐसी घटना याद करके बोला जो नैना...

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 संघर्ष तो करना पड़ता है जीतने के लिए दूसरों को हराना पड़ता है आज तो खुद के अनमोल विचारों को भी अपना बताने के लिए प्रमाण देना पड़ता है, सुमित सक्सेना। अजीब समय है, स्त्रियां हि नहीं पुरुष भी संकट में है। विचारों को आने दो, एक लय बन जाने दो, शब्द घूमेंगे संगीत बनकर जब मन में, कागज पर चिपक जाएगा कलम अपने तन मन से।  हमसफ़र मिले या ना मिले इस सफर में, लेकिन जिंदगी सुकून से काटेंगे। तन मन का साथ देने के लिए कोई साथ हो इस जिंदगी में, पर जिंदगी में और भी सकून होगा। जब कोई शायर घुसता है इस मन में तो साला कोरा कागज भी खाली नहीं रहता, और जब एक आशिक घुसता है इस सीने में,  मार्टिन लूथर किंग ने कहा- "अगर तुम उड़ नहीं सकते तो,दौड़ो ! अगर तुम दौड़ नहीं सकते तो,चलो ! अगर तुम चल नहीं सकते तो,रेंगो ! पर आगे बढ़ते रहो... ..... jab kudkudata h bachpan to main abhi bacha ban kata hi is nirdai samaj ko dikhane ke liye main fir se bada hi jata hu आपका नाम भले ही बड़ा हो गया हो लेकिन लिखते हम आज भी आपसे अच्छा। i hate those people who hate love jab sochta hu gehrai se khud ke baare me, main main ...

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Chapter 8 part 1

 अमन ने देखा कि उस बाथरूम का दरवाज़ा स्वयं बंद हो चुका था, उसने तीव्रता से द्वार खोला और द्वार खोलते ही सागर उसके सामने खड़ा था, संभवतः वह भी अमन को ही ढूँढ़ रहा था। सागर को देखते ही अमन का चेहरा खिल उठा, ऐसा लगा जैसे भगवान ने उसकी बात सुन ली हो, वे दोनों अब पुनः एक दूसरे के साथ थे। सागर कि हालत ऐसी लग रही थी जैसे उसकी किसी के साथ भयानक कुश्ती हुई हो, उसके कपड़े अस्तव्यस्त दिख रहे थे, बाल बिखरे हुए थे और चेहरा लाल पड़ चुका था। अमन को देखते ही सागर ने उसे अपने गले लगा लिया, लेकिन जैसे ही सागर का मेल-मिलाप पूरा हुआ, अमन ने उसकी हालत देखते हुए उससे पूछा, “ तुम्हारी ऐसी हालत कैसे हुई? लगता है किसी ने जमकर बैंड बजाई है तुम्हारी! ” “ मेरी छोड़िए! आपको क्या हुआ है और ये खून कैसे निकल रहा है? ” सागर ने अमन के प्रश्न कि उपेक्षा कर, खून से भीगी उसकी कमीज़ देखते हुए बड़ी चिंता से पूछा। सागर अमन को सहारा देने के विचार से आगे बढ़ा, लेकिन अमन ने उसे अपने हाथ के इशारे से रोक दिया। “ तुम्हें क्या लगता है, मैं इतना कमज़ोर हूँ। ” अमन ने सागर के मन में उपजे विचार को भाँपते हुए कहा। “ सर, आपकी हालत खर...

chapter 5

 अमन सीढ़ियों से होता हुआ नीचे पहुँचा, नीचे एक और दरवाज़ा उसकी प्रतीक्षा कर रहा था। जब उसने सिर उठाकर ऊपर देखा, तो वह दरवाज़ा स्वयं ‌बंद हो चुका था, जिस दरवाज़े से वह वहाँ तक पहुँचा था। अमन को लगा कि जो दरवाज़ा उसके सामने था, उसके पीछे कोई तहखाना होगा, जहाँ अवश्य कोई खतरा हो सकता था, उसे उस अज्ञात संकट से डर तो लग रहा था, किंतु उसने अधिक न सोचते हुए अपनी खाली बंदूक तानकर उस दरवाज़े पर एक ज़ोरदार लात मारी। दरवाज़ा खुलते ही जो दृश्य उसे दिखा, उसने कल्पना में भी नहीं सोचा था कि उस दरवाज़े के पीछे एक विशाल हॉल होगा। उस स्थान को देखकर वह दंग रह गया, गरीबी में अपना जीवन काटने वाले अमन ने इतना विशाल और भव्य हॉल पहली बार देखा था। उसे वह हॉल किसी भूतिया फिल्म के सेट के समान ही लग रहा था, जहाँ काँच की खाली बोतलों से भरा हुआ एक ड्रिंक काउंटर था, जहाँ भूतिया फिल्म की तरह ऊपर जाती हुई विशाल और चौड़ी सीढ़ियाँ लकड़ियों की थीं, जहाँ युद्धक मुद्रा में गेंडों की दो प्रतिमाएं भी थीं जो किसी रहस्यमई द्वार की रक्षा कर रही थीं। अमन ने उस हॉल में कुल पाँच लोगों को खड़ा देखा। अमन ने हॉल में खड़े उन बच्चों...