“ मुझे वॉशरूम जाना है।” नैना ने रोते हुए कहा।
“ यहीं कर लो जो भी करना है।” अश्वत ने कहा। अश्वत ने उसे कूड़ा दान उठा कर दिया।
“ यीयू! पागल हो, यहाँ, किचन में और वो भी इस कचड़े के डिब्बे में और तुम्हारा सामने कभी नहीं।”
“ हाँ तो, कचड़े के डिब्बे में नहीं , तो क्या कढ़ाई में करना है।” अश्वत ने कहा, देखो जो भी करना है यहीं कर लो क्योंकि अगर हम एक बार बिछड़े, तो हो सकता है हम कभी न मिलें।”
उसे अश्वत के सामने पॉटी करने के विचार से ही शर्म आ रही थी। लेकिन अश्वत को
“ ठीक है मैं किचन के बाहर खड़ा रहूंगा लेकिन तुम्हें दरवाज़ा खोल कर रखना होगा।” अश्वत नैना से बिछड़ना नहीं चाहता था और वह जानता था की अगर एक बार दरवाज़ा बंद हो गया तो वह उस नैना से बिछड़ जाएगा जिसे वह सुरक्षित रखना चाहता था।
“ आ…” नैना से तंग हो कर अश्वत के मुंह से फूंकरते हुए एक अजीब सी
आवाज़ निकली।
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